खेल मंत्रालय ने 23 जुलाई से ग्लास्गो में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) के लिए 191 लोगों के भारतीय दल को मंजूरी दे दी है। इस पूरे दल में कुल 126 खिलाड़ी और टीम के 51 सपोर्ट स्टाफ शामिल हैं। अगर प्लेयर्स की बात करें, तो इस कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने के लिए भारत की तरफ से 78 मेंस प्लेयर और 48 वुमेंस प्लेयर का नाम शामिल है। स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री ने साफ कर दिया है कि भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) या किसी भी खेल महासंघ के चुने हुए अधिकारियों के विदेश दौरे और रहने का खर्च सरकार नहीं उठाएगी। भारतीय दल के प्रमुख रोहित राजपाल IOA की कमेटी के सदस्य भी हैं, इसलिए अगर यह नियम उन पर लागू हुआ, तो उन्हें अपना खर्च खुद उठाना होगा। सपोर्ट स्टाफ की श्रेणी में केवल कोच, मेडिकल टीम और सहयोगी स्टाफ को ही रखा गया है।
नीरज चोपड़ा की अगुवाई में ग्लास्गो जाएगी सबसे बड़ी टीम
ग्लास्गो जाने वाली भारतीय टीम में सबसे बड़ा दल एथलेटिक्स का है, जिसमें स्टार खिलाड़ी नीरज चोपड़ा समेत 32 खिलाड़ी शामिल हैं। इस टीम में 10 महिला खिलाड़ी हैं और हेड कोच राधाकृष्णन नायर के साथ सबसे ज्यादा सपोर्ट स्टाफ भी जा रहा है। बॉक्सिंग में मेडल जीतने के लिए 14 मुक्केबाज जा रहे हैं, जिनके कोच स्वीडन के सैंटियागो नीवा होंगे। उनके साथ इकलौती महिला कोच मंदाकिनी चानू और खिलाड़ियों के मानसिक हौसले के लिए मैथिली भूपतानी भी रहेंगी। इसके अलावा, मीराबाई चानू की कप्तानी में 12 भारोत्तोलक (वेटलिफ्टर्स) और 5 तैराक (स्विमर्स) भी जा रहे हैं, जिनकी देखभाल निहार अमीन और संदीप सेजवाल करेंगे। साथ ही, पैरा-खिलाड़ियों की मदद के लिए भी 42 लोगों का एक बड़ा स्टाफ जा रहा है, जिसमें सबसे ज्यादा लोग एथलेटिक्स से हैं।
भारत की मेडल संख्या में हो सकती है कमी
बजट की कमी के कारण इस बार ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स बहुत छोटे पैमाने पर हो रहे हैं। इसमें केवल 10 सामान्य वर्ग और 6 पैरा खेल ही रखे गए हैं। भारत के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि जिन खेलों में देश हमेशा सबसे ज्यादा मेडल जीतता था जैसे निशानेबाजी, हॉकी, बैडमिंटन, कुश्ती और क्रिकेट उन्हें इस बार हटा दिया गया है। इसी वजह से इस बार भारत के कुल मेडलों की संख्या कम होने का डर है। भारत इस बार 9 सामान्य वर्ग और 5 पैरा खेलों में हिस्सा लेगा।
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